Wednesday, October 4, 2023

डॉ. सिग्मण्ड फ्रायड मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त : रक्षात्मक युक्तियाँ

रक्षात्मक युक्तियाँ ऐसे व्यवहार हैं जिनका उपयोग लोग अप्रिय घटनाओं, कार्यों या विचारों से खुद को अलग करने के लिए करते हैं। रक्षात्मक युक्तियाँ मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत के अंतर्गत आती हैं। मनुष्य व्यक्तित्व के तीन उपतंत्रों के इड, अहं और सुपर ईगो के कारण मानवी व्यक्तित्व में खींचतान चलती रहती है, ये मनोवैज्ञानिक रणनीतियाँ इस खींचतान का पर्दाफाश बाहरी दुनिया के लोगों के सामने प्रकट होने के खतरे से बचाने के लिए व्यक्ति द्वारा अपनाई जाती हैं। पहली बार सिगमंड फ्रायड द्वारा प्रस्तावित, यह सिद्धांत समय के साथ विकसित हुआ है और यह तर्क देता है कि व्यवहार, जैसे रक्षा तंत्र, किसी व्यक्ति के सचेत नियंत्रण में नहीं हैं। वास्तव में, ज्यादातर लोग इसे साकार किए बिना करते हैं। इन सिद्धांतों के अनुसार, रक्षा युक्तियाँ  मनोवैज्ञानिक विकास का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं। यह पहचानना कि आप, आपके प्रियजन और यहां तक ​​कि आपके सहकर्मी किस प्रकार का उपयोग करते हैं, भविष्य की बातचीत और मुठभेड़ों में आपकी मदद कर सकते हैं। रक्षा युक्तियाँ वे तरीके हैं जिनसे आप उन स्थितियों पर प्रतिक्रिया करते हैं जो नकारात्मक भावनाओं को सामने लाती हैं। मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत के अनुसार, जब आप एक तनाव का अनुभव करते हैं, तो अवचेतन पहले स्थिति की निगरानी करेगा कि क्या यह आपको नुकसान पहुंचा सकता है। यदि अवचेतन को लगता है कि स्थिति से भावनात्मक नुकसान हो सकता है, तो यह आपकी रक्षा के लिए एक रक्षा तंत्र के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है। ये समस्या का समाधान नहीं करती हैं बल्कि समस्या के स्वरूप को विकृत कर हमें चिंता से तुरंत के लिए राहत प्रदान करती हैं।

फ्रायड ने पहली बार 1926 में रक्षा तंत्र के विचार पर विस्तार से बताया और उनकी बेटी अन्ना फ्रायड ने अवधारणा को और परिष्कृत और व्यवस्थित किया। रक्षा प्रक्रमों में दो विशेषताएँ पाई जाती हैं -

1.    रक्षा प्रक्रम अचेतन स्तर पर कार्य करते हैं इसलिए व्यक्ति को इनके सक्रीय होने का ज्ञान नहीं रहता है। अतः ये आत्म-भ्रामक होते हैं।

2.    रक्षा प्रक्रम व्यक्ति के दुश्चिंता के तीव्रता स्तर को तुरंत कम करके उसे राहत पहुँचाने का ढोंग करके वास्तविकता के ज्ञान से विकृत कर देते हैं।

रक्षा प्रक्रम शब्द का प्रयोग पहली बार सिगमंड फ्रायड के पेपर "द न्यूरो-साइकोज ऑफ डिफेंस" (1894) में किया गया था।[1] डॉ सिग्मंड फ्रायड और उनकी पुत्री अन्ना फ्रायड ने अनेक रक्षा युक्तियों का वर्णन किया है। जिसमें कुछ मुख्य रक्षा युक्तियाँ निम्नलिखित हैं –

Ø  दमन (Repression) - फ्रायड के अनुसार यह सबसे प्रमुख रक्षा युक्ति है, यह हर दूसरे में शामिल है। यह व्यक्ति के पूरे जीवनकाल कायम रहती है। इड की इच्छाओं की पूर्ति से जब अहं इंकार कर देता है तो वह इच्छाएँ दमित होकर अचेतन में बैठ जाती हैं। दमित यादें अवचेतन साधनों के माध्यम से और परिवर्तित रूपों में प्रकट हो सकती हैं, जैसे स्वप्न या जबान का फिसलना।

Ø  युक्तिकरण (Rationalization) - बहाने बनाना इसका सामान्य अर्थ है। युक्तिकरण अन्ना फ्रायड द्वारा प्रस्तावित एक रक्षा तंत्र है जिसमें किसी घटना या आवेग को कम खतरनाक बनाने के लिए "तथ्यों" की संज्ञानात्मक विकृति शामिल है। जब हम खुद को बहाने देते हैं तो हम इसे काफी सचेत स्तर पर करते हैं। लेकिन बहुत से लोगों के लिए, संवेदनशील अहंकार के साथ, बहाने बनाना इतना आसान हो जाता है कि उन्हें इसके बारे में कभी पता ही नहीं चलता। दूसरे शब्दों में, हम में से बहुत से लोग अपने झूठ पर विश्वास करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस प्रक्रम में व्यक्ति अपनी असफलताओं के लिए सामाजिक स्वीकार्य बहाने बनाता है।  उदाहरण के लिए परीक्षा में कम मार्क्स आने पर विद्यार्थी का यह कहना कि हॉस्टल का वातावरण अच्छा नहीं था।

Ø  प्रतिगमन ( Regression) - इसका शाब्दिक अर्थ होता है पीछे की ओर लौटना। रिग्रेशन रिट्रीट के रूप में कार्य करता है, एक व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक रूप से उस अवधि में वापस जाने में सक्षम बनाता है जब व्यक्ति सुरक्षित महसूस करता था। जब एक व्यस्क बच्चे की तरह व्यवहार करता है तो वह प्रतिगमन की अवस्था होती है। क्योंकि व्यक्ति अपने तनाव एवं चिंता को कम करने के लिए अपने सुखमय अतीत में लौटने की क्रिया कर रहा होता है। देखा गया है जब व्यक्ति दुखी, परेशान या भयभीत होते हैं, तो उनके व्यवहार अक्सर अधिक बचकाने या आदिम हो जाते हैं।

Ø  प्रक्षेपण ( Projection) - दूसरों पर अपनी कमियाँ, कमजोरियाँ आरोपित करना ही प्रक्षेपण कहा जाता है। फीस्ट एवं ग्रेगोरी जे (2008) के अनुसार "जब एक आंतरिक आवेग बहुत अधिक चिंता को भड़काता है, तो अहं अवांछित आवेग को बाहरी वस्तु, आमतौर पर  आपके किसी करीबी या पुत्र के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उस चिंता को कम कर सकता है। यह प्रक्षेपण का रक्षा तंत्र है[2] जब व्यक्ति स्वयं में कमियाँ होने से इंकार करके उन्हें दूसरे लोगों या वातावरण के प्रति अपनी अमान्य प्रस्तुतियों, मनोवृत्तियों एवं व्यवहारों के रूप में आरोपित करता है।

Ø  प्रतिक्रिया निर्माण (Reaction Formation) - इस मनोरचना में व्यक्ति अपने अहं को किसी अप्रिय इच्छा तथा प्रेरणा से ठीक उसके उलट इच्छा या प्रेरणा विकसित कर बचाता है।  प्रतिक्रिया गठन को अन्ना फ्रायड ने "विपरीत विश्वास" कहा, एक मनोवैज्ञानिक रक्षा तंत्र है जिसमें एक व्यक्ति इनकार से परे जाता है और विपरीत तरीके से व्यवहार करता है जिसके लिए वह सोचता है या महसूस करता है। एक व्यक्ति अपने सामाजिक रूप से अस्वीकार्य अचेतन विचारों या भावनाओं के बारे में जो चिंता महसूस करता है, उसकी भरपाई के लिए सचेत व्यवहार को अपनाया जाता है। आमतौर पर, एक प्रतिक्रिया गठन को अतिरंजित व्यवहार, जैसे दिखावटीपन और मजबूरी से चिह्नित किया जाता है। फिस्ट (2008) के अनुसार "एक ऐसा भेष धारण करना जो सीधे अपने मूल रूप के विपरीत हो। इस रक्षा व्यवस्था को प्रतिक्रिया निर्माण कहा जाता है। प्रतिक्रियाशील व्यवहार को उसके अतिरंजित चरित्र और उसके जुनूनी और बाध्यकारी रूप द्वारा पहचाना जा सकता है[3] एक भ्रष्ट नेता द्वारा भ्रष्टाचार पर भाषण देना इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।

Ø  उदात्तीकरण (Sublimation) - इस प्रक्रम में व्यक्ति अपनी असंतुष्ट इच्छाओं की पूर्ति समाज द्वारा स्वीकृत लक्ष्यों या उद्देश्यों के रूप में प्रतिस्थापित करके करता है। उत्थान विस्थापन के समान है, लेकिन यह तब होता है जब हम अपनी अस्वीकार्य भावनाओं को विनाशकारी गतिविधियों के बजाय रचनात्मक और सामाजिक रूप से स्वीकार्य व्यवहारों में विस्थापित करने का प्रबंधन करते हैं। उच्च बनाने की क्रिया अन्ना फ्रायड के मूल रक्षा तंत्रों में से एक है। एक निसंतान महिला का बाल कल्याण केंद्र खोलना इसका अच्छा उदाहरण है।

Ø  विस्थापन (Displacement) - विस्थापन तब होता है जब इड कुछ ऐसा करना चाहता है जिसकी अनुमति सुपर ईगो नहीं देता है। इस प्रकार अहं, इड की मानसिक ऊर्जा को मुक्त करने का कोई अन्य तरीका ढूंढता है। इस प्रकार एक दमित वस्तु कैथेक्सिस से अधिक स्वीकार्य वस्तु में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है। ये भावनाएँ आक्रामकता से सम्बंधित होती हैं और व्यक्ति किसी वस्तु विशेष या व्यक्ति से हटाकर किसी दूसरे पर विस्थापित कर देता है। जैसे ऑफिस में बॉस से डाँट खाने पर व्यक्ति घर आकर बच्चों को डाँटकर अपने गुस्से को निकाल लेता है।

Ø  नकारना (Denial) - ऐसी घटना जो व्यक्ति के लिए अत्यंत कष्टप्रद और अरुचिकर होती है तो व्यक्ति उसके अस्तित्व को ही मानने से इंकार कर देता है और थोड़े समय के लिए अपने को तकलीफ से बचा लेता है। इनकार सबसे आम रक्षा तंत्रों में से एक है। यह तब होता है जब आप वास्तविकता या तथ्यों को स्वीकार करने से इनकार करते हैं। इनकार में लोग बाहरी घटनाओं या परिस्थितियों को अपने दिमाग से रोक सकते हैं ताकि उन्हें भावनात्मक प्रभाव से निपटना न पड़े। दूसरे शब्दों में, वे दर्दनाक भावनाओं या घटनाओं से बचते हैं।

उपरोक्त के अलावा भी अनेक रक्षा युक्तियाँ होती है जिनका उपयोग व्यक्ति अपने अहं की रक्षा हेतु करता है। व्यक्ति इन रक्षा युक्तियों का उपयोग भले ही करता हो लेकिन वह इनके प्रति जागरूक नहीं होता तथा इनसे अनभिज्ञ भी होता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप व्यवहार को संशोधित या बदल नहीं सकते हैं। वास्तव में, आप अस्वस्थ रक्षा तंत्रों को अधिक टिकाऊ रक्षा तंत्रों में बदल सकते हैं।



[1] Freud, Sigmund (2014) The Neuro-Psychoses of Defence, New York: Read Book Publisher

[2] Fiest, Gregory J. (2008) Theories of Personality, New York: McGraw-Hill company, p. 37

[3] Fiest, Gregory J. (2008) Theories of Personality, New York: McGraw-Hill company, p. 35

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